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शादी और सरकारी नौकरी का झांसा देकर नर्सिंग स्टाफ से 32 लाख की ठगी, आरोपी पिथौरागढ़ से गिरफ्तार

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देहरादून। शादी और सरकारी नौकरी का झांसा देकर नर्सिंग स्टाफ की युवती से करीब 32 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने वाले आरोपी को नेहरू कॉलोनी थाना पुलिस ने पिथौरागढ़ से गिरफ्तार किया है। आरोपी स्वास्थ्य विभाग में करीब छह साल तक संविदा पर फार्मासिस्ट रह चुका है। पुलिस के मुताबिक, वह अपनी पुरानी विभागीय पहचान का हवाला देकर सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं को ठगी का शिकार बनाता था। आरोपी के खिलाफ नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस के अनुसार, 17 अगस्त को देहरादून के एक निजी अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत युवती ने नेहरू कॉलोनी थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। युवती ने बताया कि उसकी मुलाकात आरोपी चारू चंद्र जोशी से एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट के माध्यम से हुई थी। आरोपी ने खुद को स्वास्थ्य विभाग में ड्रग इंस्पेक्टर बताते हुए विभागीय अधिकारियों से अच्छी पहचान होने का दावा किया।

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आरोप है कि चारू चंद्र जोशी ने युवती से शादी करने और उसे स्वास्थ्य विभाग में सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा दिया। इसके बाद उसने अलग-अलग तारीखों पर नौकरी पक्की कराने के नाम पर युवती से करीब 32 लाख रुपये ले लिए। काफी समय बीतने के बाद भी जब नौकरी नहीं लगी तो युवती को अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ और उसने पुलिस से शिकायत की। शिकायत के आधार पर नेहरू कॉलोनी पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि आरोपी के खिलाफ पहले भी नौकरी लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी समेत कई मुकदमे दर्ज हैं और वह पूर्व में जेल भी जा चुका है।

नेपाल भागने की फिराक में था आरोपी

पुलिस ने सर्विलांस और अन्य माध्यमों से आरोपी की तलाश शुरू की। इस दौरान पता चला कि वह पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा है और पिथौरागढ़ के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में था। सूचना के बाद नेहरू कॉलोनी पुलिस ने पिथौरागढ़ पुलिस से समन्वय किया। इसके बाद पुलिस टीम ने पिथौरागढ़ के एंचोली क्षेत्र से आरोपी चारू चंद्र जोशी को गिरफ्तार कर लिया। उसे स्थानीय न्यायालय में पेश कर ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया, जिसके बाद पुलिस उसे देहरादून लेकर पहुंची।

पुरानी विभागीय पहचान का उठाया फायदा

सीओ डालनवाला नितिन लोहनी के मुताबिक, आरोपी वर्ष 2016 में स्वास्थ्य विभाग में संविदा पर फार्मासिस्ट के पद पर कार्यरत था। वर्ष 2022 में नैनीताल जिले में उसके खिलाफ धोखाधड़ी और दुष्कर्म के मुकदमे दर्ज हुए, जिसके बाद वह जेल गया और स्वास्थ्य विभाग की नौकरी से हटा दिया गया।

जेल से बाहर आने के बाद आरोपी ने अपनी पुरानी नौकरी और विभागीय पहचान का फायदा उठाना शुरू कर दिया। वह खुद को स्वास्थ्य विभाग में नियुक्त बताकर अधिकारियों से अच्छी पहचान होने का झांसा देता था और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर लोगों से मोटी रकम ऐंठता था।

सीओ डालनवाला ने बताया कि आरोपी के खिलाफ हल्द्वानी, नैनीताल, काशीपुर और देहरादून में नौकरी के नाम पर धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक घटनाओं से जुड़े आधा दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं।

पुलिस के मुताबिक, वर्तमान मामले की अब तक की जांच में आरोपी द्वारा व्यक्तिगत स्तर पर नौकरी दिलाने का झूठा आश्वासन देकर धोखाधड़ी करना सामने आया है। वहीं, अभी तक की जांच में आरोपी के किसी परीक्षा एजेंसी या चयन प्रक्रिया से जुड़े व्यक्ति के संपर्क में होने के साक्ष्य नहीं मिले हैं।