सहकारी समितियों के कर्मचारियों की हड़ताल छठे दिन भी जारी, कामकाज प्रभावित
चम्पावत में समितियों पर ताले जैसे हालात, किसानों को ऋण, बीज-खाद और मोटे अनाज की बिक्री में परेशानी
चम्पावत। सरकारी सहकारी समितियों के सचिव-कर्मचारी संयुक्त संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर चल रही प्रदेशव्यापी हड़ताल मंगलवार को छठे दिन भी जारी रही। जनपद चम्पावत की विभिन्न सहकारी समितियों के कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते समितियों का कामकाज प्रभावित होने से किसानों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों के अनुसार सहकारी समितियों के माध्यम से किसानों को ऋण, बीज और खाद उपलब्ध कराने के साथ ही मोटे अनाज की बिक्री समेत कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाते हैं। हड़ताल के कारण इन सेवाओं के प्रभावित होने से किसानों के सामने परेशानियां खड़ी हो गई हैं। वहीं कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं किया जाता, आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की है।

हड़ताल के कारण जिले के किसानों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों के मुताबिक सहकारी समितियों के माध्यम से सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाने का काम किया जाता है। ऐसे में कर्मचारियों की हड़ताल लंबी खिंचने पर इन योजनाओं और समिति से जुड़ी सेवाओं का संचालन भी प्रभावित हो सकता है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो हड़ताल को और उग्र किया जाएगा। वहीं, आंदोलन को लेकर सहकारी समितियों के अध्यक्षों और क्षेत्रीय किसानों के समर्थन की बात भी सामने आई है।
सहकारी समितियों के सचिव-कर्मचारी संयुक्त संगठन उत्तराखंड के आह्वान पर चल रही हड़ताल के बीच कर्मचारियों ने अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार से शीघ्र कार्रवाई की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान नहीं होने के कारण उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें…
कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में पैक्स के संबंध में समानकोष एवं व्यवसाय वाली नवगठित पैक्स का पंजीकरण निरस्त करने तथा भौगोलिक स्थिति और वर्तमान में संचालित पैक्स के व्यवसाय एवं गैर-कारोबारी संभावनाओं के आधार पर नई पैक्स के गठन की मांग शामिल है।
इसके अलावा ग्रामीण बचत केंद्र और ऋण व्यवसाय से जुड़े मामलों में ग्रामीण बचत केंद्रों के नियंत्रण, संरक्षण तथा समितियों द्वारा वितरित ऋण के लिए स्पष्ट नीति बनाए जाने की मांग की गई है।
कर्मचारियों ने सचिव एवं कर्मचारियों को सहकारिता ढांचे में समावेश करने की मांग भी उठाई है। इसके तहत कर्मचारियों को सहकारिता ढांचे में समायोजित करने की मांग की गई है।
एक अन्य मांग में सहकारी समिति के कर्मचारियों को राज्य स्वास्थ्य सुरक्षा योजना और गोल्डन कार्ड से जोड़ने की मांग की गई है, ताकि कर्मचारियों को स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं का लाभ मिल सके।
कर्मचारियों ने वेतन विसंगति समिति की संस्तुति के आधार पर तत्काल आवश्यक शासनादेश जारी करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई है।
छठी मांग के तहत कर्मचारियों की पदनाम संबंधी समस्या का समाधान करने की मांग की गई है। कर्मचारियों का कहना है कि सचिव के पद पर कार्यरत कार्मिकों की पदोन्नति के लिए विकास अधिकारी एवं वरिष्ठ शाखा प्रबंधक के स्तर तक पदोन्नति की व्यवस्था की जाए।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांगें लंबे समय से लंबित हैं। ऐसे में सरकार को कर्मचारियों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार करते हुए जल्द निर्णय लेना चाहिए, ताकि हड़ताल समाप्त हो और सहकारी समितियों से जुड़ी सेवाएं सुचारु रूप से संचालित हो सकें।

