बारिश का कहर! तेज बहाव में पुल बहा, आदि कैलाश के भक्त बीच रास्ते में फंसे
सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी बारिश के बाद आपदा जैसे हालात बने हुए हैं, कई जगहों पर सड़कें बह गई हैं
पिथौरागढ़। उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ में भारी वर्षा के चलते चीन सीमा को जोड़ने वाले प्रमुख सड़क मार्ग कई स्थानों पर भूस्खलन की चपेट में आ गए हैं। हालात ऐसे हैं कि धारचूला तहसील क्षेत्र के 50 से अधिक गांवों का संपर्क तहसील मुख्यालय से कट गया है। इसी बीच रविवार से प्रस्तावित कैलाश मानसरोवर यात्रा से पहले मौसम की मार ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

सबसे अधिक असर टनकपुर-तवाघाट राष्ट्रीय राजमार्ग पर देखने को मिला, जहां तवाघाट के समीप पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर गिरने के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इसके अलावा तवाघाट-लिपुलेख (कैलाश मानसरोवर) मार्ग भी कई स्थानों पर भूस्खलन के चलते बंद हो गया है। वहीं आदि कैलाश यात्रा मार्ग के मलघाट क्षेत्र में लगातार पत्थर गिरने से आवाजाही बेहद जोखिमपूर्ण बनी हुई है। यात्रा पर निकले कई श्रद्धालु बीच रास्ते में फंस गए हैं, जबकि दारमा और व्यास घाटी की ओर जाने वाले वाहनों को तवाघाट क्षेत्र में ही रोक दिया गया है।
बारिश का असर सीमा क्षेत्रों तक भी पहुंचा है। तवाघाट-सोबला-तिदांग सीमा मार्ग पर चार से पांच स्थानों पर मलबा आने से चीन सीमा का सड़क संपर्क पूरी तरह बाधित हो गया है। वहीं धारचूला तहसील के घटखोला-सीनियाखोला को जोड़ने वाला पैदल पुल तेज बहाव में बह गया, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है।
प्रशासन और सड़क निर्माण एजेंसियां बंद मार्गों को खोलने के लिए लगातार राहत एवं बहाली कार्य में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश के कारण कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार बीती रात क्षेत्र में 82 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जिससे भूस्खलन की घटनाओं में तेजी आई। प्रशासन ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, नदी-नालों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की है। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी गई है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है।

