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मृतक आश्रित कोटे में नौकरी पाने के लिए हाईकोर्ट तक लड़ी थी कानूनी लड़ाई, महज दो सप्ताह पहले मिली थी नौकरी; लालकुआं हादसे ने उजाड़ दिया परिवार का आखिरी सहारा

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माता-पिता के बाद भाई भी छिना, 12 साल की बहन को अकेला छोड़ गया चेतन

हल्द्वानी/लालकुआं। कभी माता-पिता का साया उठा, फिर मां का साथ छूटा और अब बड़े भाई की भी दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। नैनीताल जिले के लालकुआं में हुए सड़क हादसे ने 12 वर्षीय मासूम की जिंदगी से खुशियों का आखिरी सहारा भी छीन लिया। हादसे में जान गंवाने वाले 21 वर्षीय चेतन बिष्ट अपने पीछे छोटी बहन को छोड़ गए हैं। माता-पिता की मौत के बाद बहन की जिम्मेदारी संभाल रहे चेतन ने उसे बेहतर भविष्य देने के लिए लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी थी। करीब दो सप्ताह पहले ही उन्हें वन विकास निगम में नौकरी मिली थी, लेकिन नियति ने ऐसा क्रूर मोड़ लिया कि बहन के सिर से भाई का साया भी उठ गया।

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जानकारी के अनुसार, रविवार रात करीब 10 बजे हल्द्वानी-लालकुआं क्षेत्र में नगला दवाई फार्म के पास किच्छा की ओर से आ रही स्कूटी हादसे का शिकार हो गई। इस दौरान कैंटर की चपेट में आने से स्कूटी सवार 21 वर्षीय चेतन बिष्ट और 24 वर्षीय दीक्षित बिष्ट की मौत हो गई। दो युवकों की मौत से उनके परिवारों में मातम पसरा है, लेकिन चेतन की कहानी ने इस हादसे के दर्द को और गहरा कर दिया है।

पहले पिता, फिर मां का उठा साया

चेतन बिष्ट के पिता मोहन सिंह बिष्ट वन विकास निगम में कार्यरत थे। कुछ वर्ष पहले बीमारी के चलते उनका निधन हो गया था। पिता की मौत के बाद उनकी मां को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी मिली, लेकिन करीब एक वर्ष पहले एक सड़क हादसे में मां की भी मौत हो गई। माता-पिता को खोने के बाद चेतन अपनी छोटी बहन के साथ भीमताल क्षेत्र के चाफी में अपने मामा के घर रह रहे थे। माता-पिता के निधन के बाद चेतन ही अपनी बहन की उम्मीद और भविष्य का सहारा बन गए थे। छोटी उम्र में ही बहन की जिम्मेदारी उठाते हुए वह उसके जीवन को संवारने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन रविवार रात हुए हादसे ने दोनों भाई-बहन को हमेशा के लिए अलग कर दिया।

बहन के भविष्य के लिए हाईकोर्ट तक लड़ी लड़ाई

चेतन की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। माता-पिता की मौत के बाद बहन की जिम्मेदारी निभाने के साथ उन्होंने मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी पाने के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी। इसके लिए उन्हें हाईकोर्ट तक जाना पड़ा। लंबी कोशिशों के बाद उन्हें सफलता मिली और करीब दो सप्ताह पहले ही वन विकास निगम कार्यालय में नौकरी मिली थी। नई नौकरी मिलने के साथ ही चेतन के सामने अपनी और छोटी बहन की जिंदगी संवारने की उम्मीद जगी थी। परिवार के मुश्किल दौर के बाद यह उनके जीवन में एक नई शुरुआत थी। लेकिन नौकरी मिलने के कुछ ही दिनों बाद हुए हादसे ने उनकी जिंदगी छीन ली और 12 वर्षीय बहन को एक बार फिर गहरे दुख में धकेल दिया।

एक हादसा, दो मौतें और पीछे छूट गईं अधूरी उम्मीदें

सड़क हादसे में चेतन और दीक्षित की मौत ने दो परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। चेतन की कहानी इसलिए भी मार्मिक है, क्योंकि उन्होंने माता-पिता को खोने के बाद अपनी छोटी बहन के भविष्य के लिए संघर्ष किया और नौकरी हासिल की थी। अब उनकी बहन के सामने जीवन की सबसे कठिन चुनौती है। जिस भाई ने उसके भविष्य को सुरक्षित बनाने के लिए संघर्ष किया, वही भाई अब उसके साथ नहीं है। यह हादसा सड़क सुरक्षा के प्रति सतर्कता की जरूरत को भी रेखांकित करता है। दो युवकों की असमय मौत ने कई सपनों को अधूरा छोड़ दिया है, वहीं चेतन के पीछे छूटी मासूम बहन की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसकी भरपाई आसान नहीं होगी।