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IMA POP: पहली महिला कैडेट्स की टुकड़ी में चमकीं हरियाणा की श्रीति दक्ष, पिता और बहन का भी सेना से नाता

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भारतीय सैन्य अकादमी पासिंग आउट परेड में पहली बार 9 महिला अधिकारी भी हिस्सा रहीं

देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) की ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड में जहां देश को नए सैन्य अधिकारी मिले, वहीं पहली बार अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिला कैडेट्स ने भी अपनी प्रतिभा और नेतृत्व क्षमता की मजबूत छाप छोड़ी। इनमें जूनियर अंडर ऑफिसर (JUO) श्रीति दक्ष (23 वर्ष) का नाम विशेष रूप से चर्चा में है, जिन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) और भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) दोनों संस्थानों में अपनी उपलब्धियों से नई मिसाल कायम की है।

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मूल रूप से हरियाणा के बहादुरगढ़ निवासी श्रीति दक्ष का जन्म नई दिल्ली में ऐसे परिवार में हुआ जहां राष्ट्र सेवा केवल एक पेशा नहीं बल्कि जीवन का हिस्सा रहा है। उनके पिता योगेश कुमार दक्ष भारतीय वायु सेना में पायलट रहे हैं। बचपन से ही उन्होंने अपने पिता को वर्दी में देश की सेवा करते देखा। पिता की अनुशासित जीवनशैली, कर्तव्यनिष्ठा और समर्पण ने श्रीति के मन में भी सैन्य सेवा के प्रति गहरा सम्मान पैदा किया।
सैन्य परिवेश में पली-बढ़ीं श्रीति की रुचि शुरू से ही खेलों में रहीं। उन्होंने राइफल शूटिंग, तीरंदाजी, फुटबॉल, तैराकी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में सक्रिय भागीदारी की। स्कूल के दिनों में उन्होंने राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता में भी अपने विद्यालय का प्रतिनिधित्व किया। खेलों ने उनके भीतर अनुशासन, नेतृत्व और कठिन परिस्थितियों में संघर्ष करने की क्षमता विकसित की। श्रीति ने देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, दिल्ली में बीकॉम (ऑनर्स) किया है। उनकी मां अंजू दक्ष नोएडा के स्कूल में इतिहास विभाग की एचओडी हैं। पिता भारतीय वायु सेना में विंग कमांडर रहे। बड़ी बहन कृति दक्ष भारतीय वायु सेना में फ्लाइट लेफ्टिनेंट हैं।

श्रीति बताती हैं कि जब महिलाओं के लिए साल 2022 में पहली बार नेशनल डिफेंस एकेडमी के द्वार खुले, तो मैंने इस अवसर को अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया। मैं एनडीए में प्रवेश पाने वाली शुरुआती महिला कैडेट्स में शामिल रही। यहां केवल प्रशिक्षण ही नहीं लिया, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए बैचलर ऑफ आर्ट्स स्ट्रीम में शीर्ष स्थान प्राप्त किया।
श्रीति दक्ष का मानना है कि ‘पहला’ होना केवल सम्मान पाने की बात नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। उन्होंने अपनी मेहनत और उपलब्धियों से यह साबित किया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और समर्पण अटूट हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती। आज उनकी कहानी उन युवा महिलाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं, जो सेना में शामिल होकर देश सेवा का सपना देख रही हैं। एनडीए और आईएमए में उनके द्वारा स्थापित की गई उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनेंगी और यह संदेश देंगी कि मेहनत, अनुशासन और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर किसी भी शिखर को हासिल किया जा सकता है।

भारतीय वायु सेना में फ्लाइंग ऑफिसर श्रीति की बड़ी बहन कृति ने कहा कि अब श्रीति भी सेना में अधिकारी बनकर परिवार की इस विरासत को आगे बढ़ा रही है। यह हमारे पूरे परिवार के लिए बेहद गर्व और सम्मान की बात है। श्रीति बचपन से ही पढ़ाई और खेल दोनों में अव्वल रही है। एनडीए और आईएमए तक का यह सफर आसान नहीं था, लेकिन श्रीति ने अपने समर्पण और मेहनत से हर चुनौती को पार किया। आज उसे इस मुकाम पर देखकर बेहद गर्व हो रहा है। मैं उसे इस विशेष दिन की बधाई देती हूं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूं।

बता दें कि, यह बैच अपने आप में ऐतिहासिक है। इन सभी महिला कैडेट्स ने पिछले चार वर्षों में कड़ी मेहनत और समर्पण के बल पर खुद को साबित किया है। आज जब ये अधिकारी बन रही हैं तो यह न केवल इनके लिए बल्कि पूरे देश की महिलाओं के लिए गर्व का क्षण है। भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है और ये युवा अधिकारी आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेंगी।