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जनसेवा और शिक्षा के क्षेत्र में योगदान के लिए जनार्दन चिलकोटी सम्मानित

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अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदान किया सम्मान पत्र

चम्पावत। जनपद के सामाजिक कार्यकर्ता एवं शिक्षा क्षेत्र में सक्रिय जनार्दन चिलकोटी को जनसेवा, शिक्षा और समाज कल्याण के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस एवं ‘पीढ़ियों का कारवां’ कार्यक्रम के अवसर पर देहरादून में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उन्हें सम्मान पत्र प्रदान किया। यह सम्मान समाज कल्याण विभाग, उत्तराखंड की ओर से दिया गया।

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जनार्दन चिलकोटी लंबे समय से सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं, विद्यार्थियों तथा ग्रामीण महिलाओं के बीच शिक्षा, करियर मार्गदर्शन, कौशल विकास और स्वरोजगार को लेकर कार्य करते रहे हैं। उन्होंने युवाओं को रोजगार एवं उद्यमिता के अवसरों की जानकारी देने के साथ विद्यार्थियों को करियर संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में भी भूमिका निभाई है।

एसबीआई में मुख्य प्रबंधक पद से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के बाद भी उन्होंने अपने अनुभव को सामाजिक सरोकारों से जोड़े रखा। इससे पहले वह एसबीआई ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETI), चम्पावत के निदेशक के रूप में भी कार्य कर चुके हैं। इस दौरान स्वरोजगार, उद्यमिता प्रशिक्षण और व्यक्तित्व विकास से जुड़ी गतिविधियों को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका रही।

चिलकोटी सीमांत क्षेत्र के विद्यालयों और महाविद्यालयों में करियर काउंसलिंग, युवाओं को कौशल एवं उद्यमिता के लिए मार्गदर्शन और ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने से जुड़े प्रयासों में सक्रिय रहे हैं। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी, चम्पावत के महासचिव के रूप में भी उन्होंने आपदा और जरूरतमंद परिवारों की सहायता से जुड़े कार्यों में योगदान दिया।

सम्मान को मां को किया समर्पित

सम्मान मिलने पर चिलकोटी ने इसे व्यक्तिगत उपलब्धि के बजाय समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को और मजबूत करने वाला अवसर बताया। उन्होंने कहा कि सम्मान के बाद जनसेवा के प्रति उनका दायित्व और बढ़ गया है तथा आगे भी अपने अनुभव और क्षमता का उपयोग सामाजिक कार्यों में करते रहेंगे।

उन्होंने यह सम्मान अपनी दिवंगत माता वीरांगना श्रीमती मंदोदरी देवी को समर्पित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध में पिता के शहीद होने के बाद उनकी माता ने कठिन परिस्थितियों में उनका पालन-पोषण किया और उन्हें समाज सेवा, संवेदना, संघर्ष और मानवता के संस्कार दिए। चिलकोटी ने कहा कि उनके लिए यह सम्मान माता के संस्कारों, समाज के सहयोग और लोगों के विश्वास का सम्मान है। उन्होंने अपने सामाजिक कार्यों में सहयोग देने वाले लोगों, जिला प्रशासन और समाज कल्याण विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आगे उनका प्रयास सीमांत और दूरस्थ क्षेत्रों के युवाओं, विद्यार्थियों, ग्रामीण महिलाओं तथा जरूरतमंद परिवारों तक शिक्षा, मार्गदर्शन, कौशल विकास और सामाजिक सहयोग की गतिविधियों को और प्रभावी ढंग से पहुंचाना रहेगा।