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देहरादून : डॉक्टर के डिजिटल सिग्नेचर का दुरुपयोग, नाम पर 15.82 लाख का लोन; दंपती पर 40 लाख की ठगी का भी आरोप

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देहरादून। राजधानी देहरादून में डिजिटल सिग्नेचर के कथित दुरुपयोग और करोड़ों के निवेश के नाम पर ठगी का मामला सामने आया है। सेवक आश्रम रोड निवासी डॉ. मानसी वैश्य की शिकायत पर डालनवाला थाना पुलिस ने एक फार्मा कंपनी के डायरेक्टर दंपती के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस के अनुसार, वर्ष 2019 से 2021 के बीच डॉ. मानसी की हिमांशु शेखर और उसकी पत्नी श्रुति तिवारी से पहचान हुई। दोनों ने उन्हें अपनी फार्मा कंपनी एस्टिव फार्मा के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल करने का प्रस्ताव दिया और इसी दौरान विशेष नंबर बनाने के बहाने उनके डिजिटल हस्ताक्षर (डिजिटल सिग्नेचर) तैयार कर लिए।

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शिकायत के मुताबिक, अक्टूबर 2023 में डॉ. मानसी की सहमति के बिना उन्हें कंपनी का डायरेक्टर बना दिया गया। विरोध करने पर उन्होंने अपने डिजिटल सिग्नेचर वापस मांगे और जून 2024 में उनका नाम कंपनी से हटा दिया गया।

मामले ने तब नया मोड़ लिया जब अप्रैल 2026 में डॉ. मानसी को एक पत्र मिला, जिससे पता चला कि 27 जनवरी 2024 को उनके नाम पर आईआईएफएल से 15.82 लाख रुपये का बिजनेस लोन लिया गया था। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया की उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई और न ही किसी प्रकार का ओटीपी या सत्यापन उनके माध्यम से कराया गया।

डॉ. मानसी ने यह भी आरोप लगाया कि आरोपी दंपती ने 17 मार्च 2023 को उनके पिता डॉ. विपिन वैश्य से फार्मा कंपनी में निवेश कराने के नाम पर 40 लाख रुपये लिए थे, जो अब तक वापस नहीं किए गए।

डालनवाला थाना प्रभारी नरेंद्र गहलावत ने बताया कि शिकायत के आधार पर आरोपी हिमांशु शेखर और श्रुति तिवारी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।