IMA से पास आउट हुई पहली महिला ऑफिसर, सई जाधव ने रचा इतिहास
देहरादून। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून के 93 वर्षों के गौरवशाली इतिहास में एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। देश की प्रतिष्ठित सैन्य प्रशिक्षण संस्था से पहली बार किसी महिला अधिकारी ने प्रशिक्षण पूरा कर सेना में कदम रखा है। महाराष्ट्र की रहने वाली सई जाधव ने भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर इतिहास रच दिया है और वह आईएमए से पास आउट होने वाली पहली महिला सैन्य अधिकारी बन गई हैं।
महाराष्ट्र की कोल्हापुर की रहने वाली सई जाधव ने अकादमी के इतिहास में अपनी एक अलग जगह बना ली है। दरअसल, सई जाधव भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर सेना में अफसर बनने वाली पहली महिला बन गई है। साल 1932 में स्थापित भारतीय सैन्य अकादमी अब तक करीब 67 हजार ऑफिसर्स कैडेट्स को प्रशिक्षण देकर भारतीय सेना को मजबूत कर चुकी है, लेकिन इतने लंबे इतिहास में यह पहला अवसर है जब अकादमी से कोई महिला अधिकारी सैन्य प्रशिक्षण पूरा कर सेना का हिस्सा बनी है। यह न सिर्फ अकादमी के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व और गौरव का क्षण है।

हालांकि, आगामी जून महीने में होने वाली पासिंग आउट परेड में पहली बार महिला ऑफिसर्स कैडेट्स परेड करते हुए नजर आएंगी और यह अकादमी का पहला महिला अधिकारियों का बैच होगा। लेकिन उससे पहले ही सई जाधव ने अकेले पास आउट होकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली है। चूंकि, वह इस समय अकेली महिला ऑफिसर कैडेट के रूप में पास आउट हुई हैं, इसलिए वह औपचारिक पासिंग आउट परेड का हिस्सा नहीं बनीं। हालांकि, पीपिंग सेरेमनी के दौरान उनके परिजनों ने उनके कंधों पर सितारे लगाकर इस ऐतिहासिक पल को और भी भावुक और यादगार बना दिया।
सई जाधव का सेना से जुड़ाव सिर्फ व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह पारिवारिक परंपरा का भी हिस्सा है। वह अपने परिवार में भारतीय सेना में सेवा देने वाली चौथी पीढ़ी हैं। उनके परदादा ब्रिटिश आर्मी में थे। जबकि उनके दादा और पिता भारतीय सेना में अधिकारी रह चुके हैं। वर्तमान में उनके पिता संदीप जाधव भी भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
सई जाधव मूल रूप से महाराष्ट्र की रहने वाली हैं, लेकिन उनके पिता की सैन्य सेवाओं के चलते उनकी पढ़ाई देश के अलग-अलग हिस्सों में हुई। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने ऑल इंडिया लेवल की परीक्षा पास की और फिर एसएसबी के जरिए चयनित होकर भारतीय सैन्य अकादमी तक का सफर तय किया। सई ने अकादमी में करीब छह महीने का कठोर सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया है।
सई जाधव का कहना है कि अकादमी से पहली महिला अधिकारी के रूप में पास आउट होना, अपने आप में गर्व की बात है। अब जेंटलमैन कैडेट्स की जगह ऑफिसर कैडेट्स के रूप में संबोधन किया जाना भी इस ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है। यह पल न सिर्फ उनके परिवार बल्कि हर उस परिवार के लिए गौरवमयी है, जिनके बच्चे आज सेना में कमीशन्ड हो रहे हैं।
सई के पिता संदीप जाधव कहते हैं कि वो सेना में एक अधिकारी के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, टेरिटोरियल आर्मी में पहले भी महिला अफसर मौजूद हैं, लेकिन भारतीय सैन्य अकादमी से पास आउट होकर टेरिटोरियल आर्मी में बतौर अफसर ज्वाइन करने वाली उनकी बेटी पहली महिला अफसर है। उन्हें इस बात पर गर्व है।

