टनकपुर : हाथियों का आतंक जारी, वन विभाग के आश्वासन के बाद भी गांवों में भारी नुकसान
टनकपुर/चम्पावत। ग्रामीण इलाकों में हाथियों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है। गांवों में गजराज का कहर इस कदर बरपा है कि ग्रामीण रात भर जागने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि ग्रामीणों द्वारा वन विभाग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन करने और विभाग द्वारा सुरक्षा का भरोसा दिलाने के कुछ ही घंटों बाद हाथी ने फिर से गांवों में घुसकर जमकर उत्पात मचाया।
शनिवार और रविवार की मध्यरात्रि को हाथियों का झुंड पूर्णागिरी मार्ग से लगे ककरालीगेट और नायकगोठ गांवों में जा घुसा। हाथी ने नायकगोठ गांव में कपिल शर्मा की दुकान का शटर तोड़कर उसमें रखा सामान पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। इसके अलावा, हाथी ने मनु पाल सक्सेना की कच्ची झोपड़ी और बिशन सिंह बिष्ट के घर का गेट भी तोड़ डाला। इससे पहले ककरालीगेट के भोटिया पड़ाव गांव में भी हाथी ने कहर बरपाया, जहां ग्रामीणों की आम, गन्ने और केले की लहलहाती फसलें तहस-नहस कर दी गईं। शोर मचाने और जाग होने पर ग्रामीणों ने किसी तरह एकजुट होकर हाथी को जंगल की ओर खदेड़ा।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाथियों के हमले पिछले कई दिनों से लगातार हो रहे हैं। वन विभाग को इस संबंध में सूचित किया गया और सुरक्षा के उपाय करने का अनुरोध भी किया गया, लेकिन अधिकारियों के कोरे आश्वासनों के अलावा जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी। ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के इस आतंक से न केवल स्थानीय लोगों की जान-माल को खतरा है, बल्कि पूर्णागिरी मेला में आने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। नायकगोठ की ग्राम प्रधान कंचन देवी ने वन विभाग से मांग की है कि क्षेत्र में खराब पड़ी सोलर फेंसिंग लाइन को तुरंत दुरुस्त किया जाए। प्रभावित ग्रामीणों को उनके नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।

बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष को देखते हुए शारदा रेंज के क्षेत्राधिकारी सुनील शर्मा ने बताया कि विभाग सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की योजना बना रहा है। उन्होंने कहा कि नंदौर वन्यजीव अभयारण्य की सीमा से लगे संवेदनशील गांवों के पास AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित स्मार्ट सोलर पावर्ड वाइल्डलाइफ डिटेक्शन कैमरा प्रणाली स्थापित करने की पहल की जा रही है। विभाग को उम्मीद है कि इस आधुनिक तकनीक से हाथियों की आवाजाही पर नज़र रखी जा सकेगी और संघर्ष की घटनाओं में कमी आएगी।

