चम्पावत की महिलाओं ने बदली तकदीर, चप्पल-क्रॉक्स निर्माण से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
चम्पावत। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत वर्ष 2019 में गठित ‘सरस्वती स्वयं सहायता समूह’ (ग्राम कांडा श्यामलाताल) की छह महिलाओं ने आत्मनिर्भरता की प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। सीमित संसाधनों के बावजूद इन महिलाओं ने अपने हौसले और मेहनत के दम पर चप्पल एवं क्रॉक्स निर्माण की आधुनिक यूनिट स्थापित कर न केवल अपनी आय बढ़ाई, बल्कि ग्रामीण महिला उद्यमिता का सफल उदाहरण भी पेश किया है।
समूह की महिलाएं पहले से ही गौ पालन, सब्जी उत्पादन, पहाड़ी केले की खेती और शहद उत्पादन जैसे पारंपरिक आजीविका कार्यों से जुड़ी थीं। बेहतर भविष्य और आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से उन्होंने अपने व्यवसाय का विस्तार करते हुए चप्पल और क्रॉक्स निर्माण का निर्णय लिया।

यूनिट की स्थापना के लिए महिलाओं ने ग्राम संगठन के सीआईएफ (कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड) से ₹1 लाख तथा सीसीएल (कैश क्रेडिट लिमिट) के माध्यम से ₹1 लाख का ऋण प्राप्त किया। इस वित्तीय सहयोग और अपने अथक परिश्रम के बल पर उन्होंने उत्पादन कार्य को पेशेवर तरीके से शुरू किया।
उत्पादन शुरू होते ही समूह द्वारा तैयार की गई चप्पलों को बाजार में शानदार प्रतिक्रिया मिली। शुरुआती दौर में ही विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में ऑर्डर मिलने लगे। समूह ने खटीमा के लिए 400, बनबसा के लिए 400, अमोड़ी के लिए 25 तथा सितारगंज के लिए 600 चप्पलों के ऑर्डर सफलतापूर्वक पूरे कर अपनी गुणवत्ता और कार्यक्षमता का परिचय दिया।
समूह की इस सफलता ने न केवल इन महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि जिले की अन्य स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में महिला उद्यमिता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में यह पहल एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

