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दुष्कर्म समेत गंभीर आरोपों में घिरे भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेजे गए

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दूसरी युवती ने भी लगाए शारीरिक शोषण के आरोप, पुलिस ने बढ़ाईं धाराएं; एसएसपी बोले- जांच के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई

नैनीताल। दुष्कर्म, जबरन शारीरिक संबंध बनाने, गर्भपात कराने और अन्य गंभीर आरोपों का सामना कर रहे भवाली व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे को जिला न्यायालय ने बुधवार को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मेडिकल परीक्षण के बाद पुलिस ने आरोपी को न्यायालय में पेश किया, जहां सुनवाई के उपरांत अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने के आदेश दिए। अदालत ने पुलिस को आवश्यकतानुसार आरोपी से पूछताछ करने की अनुमति भी दी है।

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मंगलवार देर रात पुलिस ने नरेश पांडे को भवाली के कहलक्वीरा स्थित उनके आवास से हिरासत में लिया था। इस दौरान आरोपी सोशल मीडिया पर लाइव होकर पुलिस कार्रवाई का विरोध करता रहा। पुलिस के अनुसार, हिरासत के दौरान उसने कथित रूप से बॉडी वॉश पी लिया, जिसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे पहले बी.डी. पांडे जिला चिकित्सालय, नैनीताल और बाद में बेहतर उपचार के लिए हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल भेजा गया। उपचार के बाद बुधवार को मेडिकल परीक्षण कराकर उसे अदालत में पेश किया गया।

मामले में बुधवार को एक नया मोड़ तब आया, जब एक अन्य युवती ने भी नरेश पांडे पर शारीरिक शोषण के आरोप लगाए। पुलिस ने दूसरी युवती को भी न्यायालय में पेश कर उसका न्यायिक बयान दर्ज कराया। इसके बाद मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 64, धारा 226 सहित अन्य प्रासंगिक धाराएं जोड़ी गई हैं।

पुलिस के अनुसार, इससे पहले इस मामले की पहली शिकायतकर्ता युवती का भी न्यायालय में बीएनएस की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने अन्य साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर दूसरी युवती का बयान भी दर्ज कराया है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी के खिलाफ अन्य महिलाओं की ओर से भी शिकायतें हैं। यदि जांच में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं तो उन्हें भी विवेचना का हिस्सा बनाया जाएगा।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. मंजूनाथ टीसी ने बताया कि आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म, जबरन शारीरिक संबंध बनाने, गर्भपात कराने समेत विभिन्न गंभीर आरोपों में मुकदमा दर्ज है। उन्होंने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।