चम्पावत : 42 साल की राष्ट्रसेवा के बाद चूड़ामणि जोशी की घर वापसी, गौरल गेट पर गूंजा ‘भारत माता की जय’
CISF के सब इंस्पेक्टर के सेवानिवृत्त होने पर चम्पावत में भव्य स्वागत, ढोल-नगाड़ों और देशभक्ति गीतों के बीच आवास तक पहुंचाया गया
चम्पावत। देश की सुरक्षा में 42 वर्षों तक सेवा देने के बाद केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के सब इंस्पेक्टर चूड़ामणि जोशी अधिवर्षता आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हो गए। चार दशक से अधिक समय तक राष्ट्रसेवा के बाद गृह जनपद चम्पावत पहुंचने पर उनका लोगों ने जोरदार स्वागत किया। गौरल गेट पर ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम्’ के नारों से पूरा माहौल देशभक्ति से सराबोर हो गया।
गौरल चौड़ गेट पहुंचते ही पहले से मौजूद परिजनों, इष्ट-मित्रों, पूर्व सैनिकों, व्यापारियों, अधिवक्ताओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के लोगों ने फूल-मालाओं और अंगवस्त्र भेंट कर चूड़ामणि जोशी का अभिनंदन किया। इस दौरान दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री श्याम नारायण पांडेय, बालेश्वर वार्ड सभासद प्रतिनिधि सनी वर्मा, भाजपा अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश मंत्री सूरज प्रहरी, व्यापार संघ के नवीन सुतेड़ी, पूर्व प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष मनोज तड़ागी, पूर्व ग्राम प्रधान लोकमणि जोशी, भाजपा नगर अध्यक्ष सुनील खर्कवाल, समाजसेवी एवं व्यापारी नेता आनंद सिंह अधिकारी, पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य बसंत तड़ागी, वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र सिंह रंसवाल, देवी दत्त बिनवाल, सेवानिवृत्त आईटीबी इंस्पेक्टर नरेश चंद्र, सब इंस्पेक्टर शंकर दत्त, पीडब्ल्यूडी के सेवानिवृत्त कर्मचारी पूरन चंद्र और व्यापारी नेता जनार्दन राय सहित अन्य लोगों ने उनका स्वागत किया।


इसके बाद गौरल चौड़ गेट से चूड़ामणि जोशी को ढोल-नगाड़ों, आतिशबाजी और देशभक्ति गीतों की धुन के बीच उनके आवास तक ले जाया गया। ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ जैसे देशभक्ति गीतों ने इस स्वागत समारोह को भावुक बना दिया। आवास पर पहुंचने पर परिजनों ने रिबन काटकर और केक काटकर उनका स्वागत किया। इस दौरान उनकी धर्मपत्नी की आंखों में वर्षों की सेवा पूरी होने का गर्व और खुशी साफ दिखाई दी। देर रात तक उन्हें बधाई देने वालों का सिलसिला जारी रहा।
1984 में शुरू हुआ था राष्ट्रसेवा का सफर
चूड़ामणि जोशी ने बताया कि वर्ष 1984 में उनका चयन देशसेवा के लिए हुआ था। इसके बाद उन्होंने CISF के माध्यम से देश के विभिन्न प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा में अपनी सेवाएं दीं। करीब 42 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन किया। उन्होंने कहा कि वर्दी उनके लिए महज नौकरी नहीं, बल्कि राष्ट्रसेवा का माध्यम रही है। उन्होंने युवाओं से देश के प्रति समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की भावना के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। चूड़ामणि जोशी ने बताया कि उनके परिवार की तीन पीढ़ियां भारतीय सेना के विभिन्न अंगों में सेवाएं देकर देश की रक्षा में योगदान देती रही हैं। उन्होंने अपने स्वागत के लिए पहुंचे सभी लोगों का हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया।

