देहरादून : 16 दिन में धंसी पुल की एप्रोच रोड, PWD के तीन इंजीनियर निलंबित
देहरादून। प्रेमनगर-नंदा की चौकी के पास टौंस नदी पर बने नए पुल की एप्रोच रोड उद्घाटन के महज 16 दिन बाद धंसने के मामले में शासन ने बड़ी कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में डिजाइन, तकनीकी पर्यवेक्षण और निर्माण की गुणवत्ता में गंभीर लापरवाही सामने आने के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) के तीन इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
नंदा की चौकी स्थित इस पुल का उद्घाटन 13 जुलाई को किया गया था। इसके बाद 28 जुलाई को एप्रोच रोड का एक हिस्सा धंस गया और सड़क के बीचोंबीच बड़ा गड्ढा बन गया। घटना के बाद निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों को लेकर सवाल उठे, जिसके बाद शासन ने मामले की प्रारंभिक जांच के आदेश दिए थे।
डिजाइन में सामने आईं गंभीर खामियां
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पुल के डिजाइन के दौरान डिजाइन कंसल्टेंट की ओर से रिवर डायवर्जन वर्क का डिजाइन तैयार नहीं किया गया था। इसके अलावा नदी के तल के क्रॉस स्लोप और नदी के प्राकृतिक बहाव को ध्यान में रखते हुए आवश्यक रिवर ट्रेनिंग मेजर्स भी प्रस्तावित नहीं किए गए।
जांच के अनुसार, इसके कारण नदी का प्रवाह एक दिशा में केंद्रित हुआ और पुल के एबटमेंट के अपस्ट्रीम हिस्से में भारी स्कॉरिंग हुई। इससे एप्रोच रोड के नीचे कैविटी बन गई और सड़क का हिस्सा धंस गया।

तीन इंजीनियरों पर गिरी गाज
शासन ने प्रथम दृष्टया सरकारी कार्यों के प्रति घोर लापरवाही, तकनीकी पर्यवेक्षण में शिथिलता और दायित्वों के निर्वहन में गंभीर त्रुटि मानते हुए प्रांतीय खंड, लोक निर्माण विभाग देहरादून के तीन अधिकारियों को निलंबित किया है।
निलंबित अधिकारियों में—
- राजेश कुमार, अधिशासी अभियंता
- अमित त्यागी, सहायक अभियंता
- नवीन गैरोला, कनिष्ठ अभियंता
शासन ने तीनों के खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के नियम 4(1) के तहत कार्रवाई की है।
निलंबन अवधि में तीनों अधिकारियों को नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता मिलेगा। सक्षम अधिकारी की अनुमति के बिना वे मुख्यालय भी नहीं छोड़ सकेंगे। तीनों को प्रमुख अभियंता, लोक निर्माण विभाग के कार्यालय से संबद्ध किया गया है।
डिजाइन और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट पर भी कार्रवाई के निर्देश
शासन ने केवल विभागीय इंजीनियरों पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रखा है। सचिव लोक निर्माण विभाग पंकज कुमार पांडेय ने प्रमुख अभियंता को निर्देश दिए हैं कि प्रारंभिक जांच में जिन डिजाइन कंसल्टेंट और प्रूफ चेकिंग कंसल्टेंट की जिम्मेदारी सामने आई है, उनके खिलाफ भी नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाए।
इसके साथ ही पुल को भविष्य में नुकसान से बचाने के लिए जांच रिपोर्ट में सुझाए गए तकनीकी उपायों पर समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उन्हें जल्द लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
शासन ने स्पष्ट किया है कि मामले में आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी की जाए, ताकि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित होने के साथ भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
नंदा की चौकी का यह पुल देहरादून से हिमाचल प्रदेश की ओर जाने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर स्थित है। उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद एप्रोच रोड धंसने की घटना ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब तीन इंजीनियरों के निलंबन और कंसल्टेंट्स पर कार्रवाई के निर्देश के बाद मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

