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नवंबर से शारदा नदी में खनन शुरू कराने की मांग, सीमांकन जल्द करने पर जोर

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देरी से सरकारी खनन को नुकसान, कारोबारियों और मजदूरों की आजीविका पर भी पड़ रहा असर; मां शारदा शक्तिमान यूनियन ने वन विभाग को सौंपा ज्ञापन

टनकपुर/चम्पावत। शारदा नदी में खनन सत्र की शुरुआत नवंबर माह के पहले सप्ताह से कराने की मांग तेज हो गई है। मां शारदा शक्तिमान यूनियन ने खनन कारोबारियों और श्रमिकों के हितों का हवाला देते हुए वन विभाग और वन निगम से खनन क्षेत्र का सीमांकन जल्द पूरा कराने की मांग की है। यूनियन का कहना है कि हर साल खनन शुरू होने में होने वाली देरी से सरकारी राजस्व के साथ ही स्थानीय कारोबारियों और मजदूरों को भी नुकसान उठाना पड़ता है।

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गुरुवार को यूनियन पदाधिकारियों ने हल्द्वानी वन प्रभाग की शारदा रेंज के रेंजर को ज्ञापन सौंपकर नवंबर की शुरुआत से खनन शुरू कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई जल्द पूरी करने का आग्रह किया। ज्ञापन में कहा गया है कि शारदा नदी में खनन देर से शुरू होने के कारण कारोबारियों को आर्थिक नुकसान होता है और विभाग को भी राजस्व की हानि उठानी पड़ती है। खनन कार्य पर निर्भर मजदूरों के सामने भी आजीविका का संकट खड़ा होता है। यूनियन के अनुसार, खनन में देरी से निजी खनन कारोबारियों को बाजार में बढ़त मिलती है, जबकि सरकारी खनन से जुड़े कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा में नुकसान उठाना पड़ता है।

समय पर खनन शुरू होने से कारोबार और रोजगार को मिलेगा सहारा

यूनियन ने सरकार से भी मांग की है कि खनन सत्र की तैयारियां समय रहते पूरी कर नवंबर के पहले सप्ताह से शारदा नदी में खनन शुरू कराया जाए। इसके लिए खनन क्षेत्र का सीमांकन और अन्य जरूरी औपचारिकताएं जल्द पूरी करने पर जोर दिया गया है।

यूनियन अध्यक्ष मनोज गुप्ता उर्फ मन्नू ने कहा कि कारोबारियों, सरकार और विभाग के हित में समय पर खनन शुरू होना जरूरी है। यूनियन इस दिशा में हर स्तर पर प्रयास कर रही है, ताकि खनन से जुड़े कारोबारियों और श्रमिकों को समय पर रोजगार मिल सके। ज्ञापन देने वालों में यूनियन उपाध्यक्ष गिरधारीलाल, सचिव संजीव मिश्रा, महासचिव हुसैन रजा और कोषाध्यक्ष सैफ अली सहित अन्य पदाधिकारी शामिल रहे।