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टनकपुर नगरपालिका में विकास कार्य ठप, प्रस्तावों की अनदेखी पर फूटा आक्रोश, सभासदों ने दिया अल्टीमेटम

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टनकपुर/चम्पावत। नगरपालिका परिषद टनकपुर में जनसमस्याओं और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों का गुस्सा फूट पड़ा है। अधिशाषी अधिकारी और अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में नगर की बदहाल व्यवस्था और बोर्ड के प्रस्तावों पर अमल न होने को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर सफाई ठेके को लेकर नगरपालिका और बोर्ड की लगातार किरकिरी हो रही है, लेकिन इसके बावजूद शीर्ष स्तर पर रहस्यमयी चुप्पी छाई हुई है। पहले इस मामले में आरएफपी (RFP) की प्रक्रिया का बहाना बनाया जा रहा था, जो छह महीने पहले ही समाप्त हो चुका है।

इसके अतिरिक्त, चरमराती जनसुविधाओं पर रोष व्यक्त करते हुए कहा गया है कि भीषण गर्मी के बावजूद पानी के कूलर अब तक नहीं लगाए गए हैं, जिससे ऐसा प्रतीत होता है कि ये कूलर शायद गर्मी का सीजन बीत जाने के बाद ही लगाए जाएंगे। प्रशासनिक ढिलाई पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया गया है कि कार्य अवधि के दौरान नगरपालिका के अधिकांश कर्मचारी अपनी सीटों से नदारद रहते हैं, जिसके कारण अपनी समस्याओं को लेकर आने वाली जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पत्र में बोर्ड बैठकों और पूर्व में पारित प्रस्तावों की अनदेखी का मामला भी प्रमुखता से उठाया गया है। नियमतः प्रत्येक महीने बोर्ड बैठक आयोजित करने का प्रस्ताव पारित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद सभासदों को बैठक बुलाने के लिए बार-बार गुहार लगानी पड़ रही है।

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इसी तरह, नगर की सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए बहुत पहले ही 40 ठेली (सफाई कर्मियों) का बोर्ड प्रस्ताव पारित किया गया था, परंतु धरातल पर महज एक ठेली से 5-5 सफाई कर्मियों का काम चलाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। जनप्रतिनिधियों ने आक्रोश जताते हुए कहा कि नगर में 200 स्ट्रीट पोल लगाने का महत्वपूर्ण बोर्ड प्रस्ताव पारित होने के बाद भी केवल अखबार की कतरनों (कटिंग) और कागजों तक ही सीमित रह गया है, जबकि 50 बेंच लगाने का एक अन्य अहम प्रस्ताव पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है।

स्वास्थ्य के मोर्चे पर भी नगर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। क्षेत्र में मच्छरों की भरमार है और डेंगू का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कीटनाशक दवाइयों का छिड़काव जमीन पर होने के बजाय सिर्फ कागजों में ही सिमटा हुआ है, जिसके लिए वार्ड सभासद बार-बार कहकर थक चुके हैं। पत्र के अंत में विकास कार्यों के दावों की पोल खोलते हुए तीखा तंज कसा गया है कि नगर में निर्माण कार्यों के केवल उद्घाटन के फोटो खिंचवाए जा रहे हैं, जबकि हकीकत में कार्य की प्रगति पूरी तरह शून्य है।

पत्र में सभासदों ने सीधे तौर पर प्रशासन को अल्टीमेटम दे दिया है। पत्र में मुख्य रूप से यह मांग की गई है कि बोर्ड बैठकों में सभासदों द्वारा जो भी प्रस्ताव रखे जाते हैं, उन पर अब तक कितना अमल हुआ है, इसकी पूरी जानकारी बोर्ड बैठक के ठीक 10 दिन बाद संबंधित सभासद को अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि नगर में वैसे तो अनगिनत समस्याएं हैं, लेकिन यदि पूर्व में उल्लेखित मुख्य समस्याओं का निवारण आज से ठीक 5 दिन बाद, यानी आगामी 2 जुलाई 2026 तक नहीं किया गया, तो सभी सभासद उग्र आंदोलन के लिए बाध्य हो जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि इस आंदोलन से उत्पन्न होने वाली किसी भी कानून-व्यवस्था या प्रशासनिक संकट की समस्त जिम्मेदारी नगरपालिका प्रशासन की होगी। पत्र देने वालों सभासद संदीप वाल्मीकि, चर्चित शर्मा, शैलेंद्र सिंह, सविता बिष्ट, वकील अहमद, बबीता वर्मा, वर्षा शर्मा, हसीब अहमद और दिलशाद अली शामिल रहे।