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चम्पावत में रिवर्स पलायन की नई मिसाल: दिल्ली की नौकरी छोड़ गांव लौटे दंपति, जैविक खेती, डेयरी और होमस्टे से कमा रहे 20 लाख रुपये वार्षिक

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चम्पावत। एक समय था जब बेहतर रोजगार और आजीविका की तलाश में पहाड़ों से बड़ी संख्या में लोग महानगरों की ओर पलायन करते थे। लेकिन अब उत्तराखंड के सीमांत जनपद चम्पावत में रिवर्स पलायन की नई और प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विकासपरक सोच, ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ती सुविधाओं तथा स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रहे प्रोत्साहन के चलते अनेक लोग अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरक मिसाल हैं लोहाघाट क्षेत्र के राकेश उपाध्याय और उनकी पत्नी हेमा उपाध्याय।

दिल्ली में अच्छी नौकरी छोड़कर अपने पैतृक गांव लौटे राकेश उपाध्याय ने अपनी पत्नी के साथ मिलकर जैविक खेती, डेयरी, मत्स्य पालन, फल एवं पुष्प उत्पादन तथा औषधीय पौधों की खेती को अपनाया। उन्होंने काली हल्दी सहित कई दुर्लभ और उच्च मूल्य वाली फसलों का उत्पादन शुरू किया है, जो भविष्य में बेहतर आय का मजबूत आधार बन रही हैं। उनके फार्म में दो दर्जन से अधिक दुधारू पशु हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग डेढ़ क्विंटल दूध का उत्पादन हो रहा है। गोबर और गोमूत्र से जैविक खाद एवं प्राकृतिक कीटनाशक तैयार किए जा रहे हैं। खेती और पशुपालन के इस समन्वित मॉडल ने आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की एक सफल मिसाल प्रस्तुत की है।

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राकेश दंपति ने अपने फार्म के साथ एक आकर्षक होमस्टे भी विकसित किया है, जहां आने वाले पर्यटकों को पहाड़ के जैविक उत्पादों से बने पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लेने का अवसर मिलता है। योग, प्राणायाम और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियां भी यहां की विशेष पहचान बन चुकी हैं। फार्म से दिखाई देने वाला हिमालय का मनोरम दृश्य पर्यटकों को विशेष रूप से आकर्षित करता है।

राकेश उपाध्याय बताते हैं कि दिल्ली में नौकरी के दौरान होने वाली आय की तुलना में वर्तमान में वे गांव में रहकर लगभग 18 से 20 लाख रुपये वार्षिक आय अर्जित कर रहे हैं। साथ ही उनके प्रयासों से स्थानीय लोगों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हो रहे हैं। उच्च शिक्षित हेमा उपाध्याय पूरी लगन के साथ खेती और पशुपालन का कार्य संभाल रही हैं। उनका कहना है कि गांव लौटने के बाद जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है। प्रकृति के बीच रहकर कार्य करने से स्वास्थ्य बेहतर हुआ है और जीवन में संतोष एवं आत्मविश्वास बढ़ा है।

राकेश और हेमा अपनी सफलता का श्रेय कृषि विज्ञान केंद्र की सब्जी वैज्ञानिक , उद्यान विभाग तथा पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए गए प्रशिक्षण और वैज्ञानिक मार्गदर्शन को देते हैं। उनका कहना है कि इन विभागों के सहयोग से उन्हें आधुनिक तकनीकों को अपनाने और सफल उद्यम स्थापित करने में मदद मिली।

राकेश उपाध्याय का मानना है कि जिलाधिकारी मनीष कुमार की नवाचारों को बढ़ावा देने वाली कार्यशैली तथा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की चम्पावत को मॉडल जनपद के रूप में विकसित करने की परिकल्पना ने उन्हें अपने गांव लौटकर कुछ नया करने की प्रेरणा दी। आज वे स्वयं सफल उद्यमी बनने के साथ-साथ अन्य किसानों एवं युवाओं को भी वैज्ञानिक खेती, जैविक उत्पादन और ग्रामीण पर्यटन के क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री की प्रेरणा और जिलाधिकारी की त्वरित कार्यशैली बनी विश्वास की आधारशिला

राकेश दंपति के फार्म तक पहुंचने वाली लगभग 100 मीटर सड़क की जर्जर स्थिति लंबे समय से समस्या बनी हुई थी, जिससे कृषि उत्पादों के परिवहन और पर्यटकों के आवागमन में कठिनाई हो रही थी। जब यह समस्या जिलाधिकारी मनीष कुमार के संज्ञान में लाई गई तो प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित अधिकारियों को मौके पर निरीक्षण एवं आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की संवेदनशील और त्वरित कार्यशैली से लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है तथा विकास कार्यों को नई गति मिली है।

चम्पावत में राकेश और हेमा उपाध्याय की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि यदि इच्छाशक्ति, नवाचार और प्रशासनिक सहयोग साथ हो तो पहाड़ की माटी में भी असीम संभावनाएं हैं। यह मॉडल न केवल आत्मनिर्भरता का उदाहरण है, बल्कि रिवर्स पलायन और ग्रामीण विकास की दिशा में एक प्रेरक पहल भी है।