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लोहाघाट अस्पताल में डॉक्टरों के तबादले से भड़का जनाक्रोश, स्वास्थ्य सेवाएं बचाने को अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू

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लोहाघाट/चम्पावत। लोहाघाट उप जिला चिकित्सालय से एक साथ आठ चिकित्सकों, जिनमें चार विशेषज्ञ डॉक्टर भी शामिल हैं, के तबादले के विरोध में क्षेत्र में जनाक्रोश फूट पड़ा है। चिकित्सकों के स्थान पर अब तक नए डॉक्टरों की तैनाती नहीं होने से नाराज लोहाघाट विकास संघर्ष समिति ने बुधवार से अस्पताल परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। समिति का कहना है कि यदि सरकार ने तबादले वापस लेकर तत्काल प्रतिस्थानी चिकित्सकों की तैनाती नहीं की तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

बुधवार को लोहाघाट विकास संघर्ष समिति ने चिकित्सकों के तबादले के निर्णय के विरोध में उप जिला चिकित्सालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। समिति अध्यक्ष विपिन गोरखा के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए तबादले तत्काल निरस्त करने की मांग उठाई।

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धरने को संबोधित करते हुए विपिन गोरखा ने कहा कि शासन ने लंबे समय बाद अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती की थी, जिससे दूरस्थ और सीमांत क्षेत्रों के मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल रहा था। लेकिन अब एक साथ चार विशेषज्ञ चिकित्सकों समेत आठ डॉक्टरों का तबादला कर सरकार ने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार गरीब और ग्रामीण जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। उनका कहना था कि यदि तबादलों को तत्काल नहीं रोका गया तो संघर्ष समिति जनता को साथ लेकर व्यापक आंदोलन करेगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

गोरखा ने यह भी कहा कि लोहाघाट अस्पताल में दूर-दराज के गांवों से बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों के हटने से मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने इस मुद्दे पर सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।
धरने को स्थानीय लोगों का भी समर्थन मिला। लोगों ने इसे जनहित से जुड़ा आंदोलन बताते हुए चिकित्सकों की जल्द पुनः तैनाती की मांग की।
धरने में राजकिशोर शाह, लोकेश पांडे, सोबन चंद, राशीद, दीपक शाह आदि शामिल रहे।