जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल: गर्भवती को रेफर करने के बाद दो अस्पतालों में मिले अलग-अलग चिकित्सकीय आकलन
चम्पावत। जिला अस्पताल चम्पावत की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। चौकी गांव की एक गर्भवती महिला को जिला अस्पताल से हायर सेंटर रेफर किए जाने के बाद हल्द्वानी के सरकारी अस्पताल और फिर खटीमा के निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। दो सरकारी अस्पतालों में मिले अलग-अलग चिकित्सकीय आकलन के बाद परिजनों ने उपचार प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं जिला अस्पताल प्रशासन ने सभी चिकित्सकीय प्रक्रियाएं तय मानकों के अनुरूप होने का दावा करते हुए किसी भी तरह की लापरवाही से इनकार किया है।
जानकारी के अनुसार, चौकी गांव निवासी 22 वर्षीय गीता बोहरा, पत्नी सागर सिंह बोहरा, को तीन दिन पहले प्रसव संबंधी जांच के लिए जिला अस्पताल चम्पावत में भर्ती कराया गया था। वह दो दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहीं। परिजनों का आरोप है कि 26 जून की रात महिला की तबीयत बिगड़ने पर चिकित्सकों ने जांच के दौरान गर्भस्थ शिशु की धड़कन कम होने की बात कही और एहतियातन उन्हें एंबुलेंस से हायर सेंटर रेफर कर दिया। परिजनों के मुताबिक, हल्द्वानी स्थित सुशीला तिवारी अस्पताल में जांच के दौरान शिशु की धड़कन सामान्य पाई गई। वहां चिकित्सकों ने प्रसव की संभावित तिथि जुलाई माह बताई। इसके बाद बेहतर उपचार की मंशा से शनिवार को परिजनों ने गीता बोहरा को खटीमा के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया।
परिजनों का कहना है कि दोनों सरकारी अस्पतालों में मिले अलग-अलग चिकित्सकीय आकलन से वे असमंजस में हैं। उनका आरोप है कि यदि जिला अस्पताल में सही आकलन किया गया था तो हल्द्वानी में रिपोर्ट सामान्य कैसे आई, और यदि हल्द्वानी का आकलन सही था तो रेफर करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
इधर, जिला अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गर्भवती का उपचार पूरी चिकित्सकीय प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया। अस्पताल प्रशासन के अनुसार मरीज की स्थिति को देखते हुए किसी भी संभावित जोखिम से बचने के लिए एहतियातन हायर सेंटर रेफर किया गया था। प्रशासन ने उपचार में किसी भी प्रकार की लापरवाही से स्पष्ट रूप से इनकार किया है। अब इस मामले में परिजनों के आरोप और अस्पताल प्रशासन के दावों के बीच वास्तविक स्थिति क्या रही, यह निष्पक्ष जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

