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25 सप्ताह में जन्मा 700 ग्राम का नवजात, दो महीने बाद स्वस्थ होकर घर लौटा; नीक्कू वार्ड ने दी नई जिंदगी

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श्रीनगर गढ़वाल। समय से तीन से चार महीने पहले जन्म लेने वाले नवजातों के लिए जिंदगी की पहली सांस से ही संघर्ष शुरू हो जाता है। फेफड़ों समेत शरीर के कई अंग पूरी तरह विकसित न होने और संक्रमण का खतरा अधिक होने के कारण ऐसे बच्चों का उपचार चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती होता है। राजकीय मेडिकल कॉलेज के बेस चिकित्सालय श्रीनगर का बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड ऐसे ही नाजुक नवजातों के लिए उम्मीद की मजबूत किरण बनकर सामने आया है।

पिछले एक वर्ष के दौरान नीक्कू वार्ड में 25 से 30 सप्ताह के बीच जन्मे कई बेहद कम वजन वाले नवजातों का सफल उपचार किया गया है। इनमें रुद्रप्रयाग समेत पर्वतीय क्षेत्रों से गंभीर अवस्था में रेफर होकर पहुंचे बच्चे भी शामिल हैं। वेंटिलेटर सपोर्ट, लगातार मॉनिटरिंग, आवश्यक दवाओं, पोषण प्रबंधन और संक्रमण से बचाव के साथ चिकित्सकों एवं नर्सिंग स्टाफ की सतत निगरानी ने कई नन्हीं जिंदगियों को नया जीवन दिया है।

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25 सप्ताह में जन्म, वजन महज 700 ग्राम

रुद्रप्रयाग के पुनाड़ क्षेत्र निवासी अल्पना नौटियाल के लिए 16 जून का दिन बेहद चिंता भरा था। उनकी डिलीवरी महज 25 सप्ताह में हो गई। जन्म के समय नवजात का वजन सिर्फ 700 ग्राम था और उसकी हालत बेहद नाजुक थी। बेहतर उपचार के लिए बच्चे को बेस चिकित्सालय श्रीनगर के नीक्कू वार्ड में भर्ती कराया गया।

करीब दो महीने तक चिकित्सकीय निगरानी और उपचार के बाद बच्चे की हालत में लगातार सुधार हुआ। उसका वजन बढ़कर 1300 ग्राम हो गया और वह मां का दूध भी पीने लगा। स्थिति स्थिर होने पर चिकित्सकों ने उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया।

जब मां अल्पना अपने बच्चे को स्वस्थ अवस्था में घर ले जाने लगीं तो उनकी आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। उन्होंने चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ का आभार जताते हुए कहा कि अस्पताल की टीम ने उनके बच्चे की अपने बच्चे की तरह देखभाल की।

‘नीक्कू ग्रेजुएट’ बनकर घर लौटा नन्हा मरीज

करीब दो महीने के उपचार के बाद जब नवजात स्वस्थ होकर घर जाने के लिए तैयार हुआ तो बाल रोग विभाग और नीक्कू वार्ड की टीम ने इस पल को यादगार बना दिया। बच्चे को ‘नीक्कू ग्रेजुएट’ का खिताब दिया गया। उसे कैप और हुड पहनाकर बधाई दी गई और नीक्कू वार्ड में केक काटकर उसकी स्वस्थ होकर घर वापसी का जश्न मनाया गया।

इस भावुक पल में बच्चे के पिता और दादी की आंखें भी नम हो गईं। परिजनों ने कहा कि चिकित्सकों ने बच्चे का उपचार करने के साथ ही मुश्किल दौर में पूरे परिवार का हौसला भी बढ़ाया। उन्होंने कहा कि बेस अस्पताल के चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत से उनके घर की खुशियां वापस लौट सकीं।

नीक्कू वार्ड की यह पहल न केवल समय से पहले जन्मे बच्चों के उपचार में चिकित्सा टीम की सफलता को दर्शाती है, बल्कि ऐसे परिवारों के लिए उम्मीद और भरोसे का संदेश भी देती है।