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चम्पावत की ऐंपण कला की दिल्ली में दस्तक, अपर्णा पनेरु ने तैयार किया भव्य वॉल म्यूरल

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चम्पावत। पहाड़ की मिट्टी से निकली उत्तराखंड की पारंपरिक ऐंपण कला अब देश की राजधानी दिल्ली में अपनी पहचान दर्ज करा रही है। चम्पावत की ललित कलाकार अपर्णा पनेरु ने नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम एंड हस्तकला अकादमी, नई दिल्ली में उत्तराखंड की ऐंपण कला पर आधारित भव्य वॉल म्यूरल तैयार कर जिले और प्रदेश का मान बढ़ाया है। खास बात यह है कि इस कलाकृति को अब म्यूजियम परिसर में स्थायी रूप से प्रदर्शित किया गया है।

बीते जून में आयोजित विशेष राष्ट्रीय कला समागम में देशभर के चुनिंदा कलाकारों को आमंत्रित किया गया था। समागम में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने अपनी लोकसंस्कृति और परंपराओं को दर्शाते हुए वॉल म्यूरल तैयार किए। इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने का अवसर चम्पावत की कलाकार अपर्णा पनेरु को मिला।

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अपर्णा ने म्यूजियम परिसर में उत्तराखंड की पारंपरिक ऐंपण कला पर आधारित पूरी वॉल म्यूरल अकेले तैयार की। कलाकृति में ऐंपण के पारंपरिक प्रतीकों, बारीक रेखांकन और सांस्कृतिक भावों को मूल स्वरूप में उकेरा गया है। इसमें उत्तराखंड की लोकपरंपरा, पहाड़ी जीवन और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत झलक दिखाई देती है।

MFA की उपाधि प्राप्त अपर्णा पनेरु लंबे समय से ऐंपण कला के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार के लिए कार्य कर रही हैं। उन्होंने कहा कि देशभर के प्रतिष्ठित कलाकारों के बीच उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए गौरव का क्षण है। वॉल म्यूरल तैयार करते समय उनका प्रयास रहा कि ऐंपण की पारंपरिक पहचान और शुद्धता से कोई समझौता न हो तथा इस लोककला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिले।

दिल्ली के प्रतिष्ठित म्यूजियम में ऐंपण कला को स्थायी स्थान मिलना सिर्फ एक कलाकार की उपलब्धि नहीं, बल्कि चम्पावत और पूरे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए गौरव का विषय है। अब देश-विदेश से म्यूजियम पहुंचने वाले पर्यटक उत्तराखंड की इस अनूठी लोककला से रूबरू हो सकेंगे। अपर्णा पनेरु की इस उपलब्धि से चम्पावत के कला जगत में खुशी और गर्व का माहौल है।