बनबसा में धामी कैबिनेट की बैठक में 24 प्रस्तावों पर मुहर, युवाओं के कौशल विकास पर पांच साल में खर्च होंगे 200 करोड़
पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार के लिए 66.29 करोड़ मंजूर, समूह ‘ग’ की भर्ती में साक्षात्कार व्यवस्था में बदलाव, स्थानीय निकायों और भूमि अधिकारों से जुड़े फैसले भी लिए
बनबसा/चम्पावत। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में रविवार को एनएचपीसी बनबसा में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में राज्यहित से जुड़े 24 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में उच्च शिक्षा के विद्यार्थियों की रोजगार क्षमता बढ़ाने, पंतनगर एयरपोर्ट के विस्तारीकरण, भूमि अधिकार, वन विभाग की प्रशासनिक व्यवस्था, कर्मचारियों के सेवा नियमों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी देते हुए अगले पांच वर्षों में इस पर करीब 200 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया। योजना से प्रदेश के करीब 1.19 लाख विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।

उच्च शिक्षा और रोजगार पर जोर
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना-2026 को मंजूरी दी। इसके तहत राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के कौशल विकास, रोजगार क्षमता और उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। योजना पर पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के मानकों में भी संशोधन किया गया है। प्रस्ताव के अनुसार पर्वतीय क्षेत्रों में न्यूनतम 2,500 वर्गमीटर और मैदानी क्षेत्रों में न्यूनतम 20,000 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र की व्यवस्था होगी। विश्वविद्यालय स्थापना के प्रस्तावों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अलग मूल्यांकन मानक भी निर्धारित किए जाएंगे।

पंतनगर एयरपोर्ट विस्तार के लिए 66.29 करोड़
ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पंतनगर के विस्तारीकरण के लिए हस्तांतरित परिसंपत्तियों के संबंध में उत्तराखण्ड सीड्स एंड तराई डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड को 66.2916 करोड़ रुपये की शेष धनराशि जारी करने को मंजूरी दी गई। इस धनराशि का उपयोग कॉरपोरेशन की कार्ययोजना के अनुसार निर्माण और अन्य निर्धारित कार्यों में किया जाएगा।
इसके अलावा सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश या मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत संबंधित सार्वजनिक अभिकरणों को देने के प्रावधान को भी मंजूरी दी गई।

भूमि अधिकार और पंजीकरण सेवाओं पर फैसले
मंत्रिमंडल ने वर्ग-3 और वर्ग-4 की भूमि के पट्टेदारों एवं कब्जाधारकों को भूमिधरी अधिकार देने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें नैनीताल जिले के लालकुआं नगर पंचायत क्षेत्र में संबंधित लोगों को संक्रमणीय भूमिधर अधिकार देने तथा देहरादून जिले के जौनसार-बावर क्षेत्र में वर्ग-4 की भूमि के विनियमितीकरण का प्रस्ताव शामिल है। संबंधित भूमि का विनियमितीकरण वर्ष 2004 के सर्किल रेट के आधार पर एक वर्ष के लिए विस्तारित किया जाएगा। इसके बाद प्रचलित सर्किल रेट लागू होगा।
टिहरी जिले की नरेंद्रनगर तहसील में उप निबंधक कार्यालय स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई। इसके कार्यक्षेत्र में नरेंद्रनगर तहसील के 98 और पावकी देवी उप तहसील के 35, कुल 133 राजस्व गांव शामिल होंगे। इससे स्थानीय लोगों को पंजीकरण संबंधी सेवाएं क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकेंगी।
संपत्ति की खरीद-फरोख्त में क्रेता-विक्रेता और अन्य संबंधित पक्षों की ओर से दिए जाने वाले पैन नंबर के सत्यापन की व्यवस्था लागू करने का भी निर्णय लिया गया। इससे गलत या फर्जी पैन के इस्तेमाल पर अंकुश लगाने और आयकर विभाग को भेजे जाने वाले आंकड़ों की शुद्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
वन विभाग में छह पदों की परियोजना प्रबंधन इकाई
वन भूमि हस्तांतरण से जुड़े मामलों के तकनीकी परीक्षण, ऑनलाइन संरेखण की जांच और नोडल कार्यालय को मजबूत करने के लिए नोडल अधिकारी, वन संरक्षण के कार्यालय में परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू) गठित की जाएगी। इसके लिए छह पद स्वीकृत किए गए हैं।
वन विभाग में विभागाध्यक्ष संबंधी व्यवस्था में भी बदलाव को मंजूरी दी गई। निदेशक, नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व को विभागाध्यक्षों की सूची से हटाकर मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं और मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल को विभागाध्यक्ष घोषित करने का प्रस्ताव है। इससे वनाग्नि, बाढ़ नियंत्रण, आपदा और मानव-वन्यजीव संघर्ष जैसी परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजकोषीय घाटे और स्थानीय निकायों के वित्त पर निर्णय
कैबिनेट ने उत्तराखण्ड राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन (संशोधन) विधेयक-2026 को मंजूरी दी। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक वार्षिक राजकोषीय घाटे की सीमा राज्य के सकल घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के तीन प्रतिशत तथा वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक कुल संचयी ऋण की अधिकतम सीमा जीएसडीपी के 30 प्रतिशत निर्धारित की गई है। आपदा और सुरक्षा संबंधी परिस्थितियों में नियमानुसार निर्धारित सीमा से अधिक घाटे की छूट का प्रावधान भी रहेगा।
छठवें राज्य वित्त आयोग की पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों से संबंधित रिपोर्ट को आगामी विधानसभा सत्र में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी गई। आयोग ने वर्ष 2026-27 से 2030-31 की अवधि के लिए स्थानीय निकायों को राज्य के शुद्ध कर राजस्व से धनराशि हस्तांतरित करने तथा वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं के संबंध में संस्तुतियां दी हैं।
समूह ‘ग’ की भर्ती और पुलिस-विजिलेंस ढांचे में बदलाव
राज्याधीन सेवाओं में समूह ‘ग’ के पदों पर साक्षात्कार प्रक्रिया से संबंधित संशोधन नियमावली को मंजूरी दी गई। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी का पद संबंधित परिशिष्ट से हटाया जाएगा। उप कारापाल के पद पर शारीरिक दक्षता परीक्षा और लिखित परीक्षा की व्यवस्था होने के कारण साक्षात्कार समाप्त करने का प्रस्ताव भी स्वीकृत किया गया।
उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग के कृत्यों के परिसीमन संबंधी संशोधन विनियम को भी मंजूरी मिली। इसके तहत जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी के पद को आयोग के संबंधित परिशिष्ट से बाहर किया जाएगा।
सतर्कता अधिष्ठान के ढांचे के पुनर्गठन को मंजूरी देते हुए 11 पद समर्पित करने और मुख्य आरक्षी नागरिक पुलिस के पांच पद बढ़ाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा अपर उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के तीन तथा मुख्य आरक्षी डाक रनर, मुख्य आरक्षी चालक और अपर उपनिरीक्षक चालक के एक-एक पद सहित छह नए पद सृजित किए जाएंगे।
भारतीय न्याय संहिता-2023 के अनुरूप सतर्कता अधिष्ठान से संबंधित वर्ष 1965 की अधिसूचना में संशोधन और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 19 के प्रावधानों को लागू करने के लिए अधिसूचना जारी करने की मंजूरी भी दी गई।
कर्मचारी नियमावली और प्रशासनिक सुधार
उत्तराखण्ड राज्य कर्मचारियों की आचरण (संशोधन) नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई। इसके तहत कर्मचारियों की चल-अचल और बहुमूल्य संपत्तियों से जुड़े प्रावधानों को अद्यतन किया जाएगा तथा नियम 15 के हिंदी अनुवाद की त्रुटि दूर की जाएगी।
नियोजन विभाग के अंतर्गत उत्तराखण्ड निवेश और आधारिक संरचना (विकास और विनियम) अधिनियम की अनुसूची-3 में संशोधन को मंजूरी मिली। इसके अनुसार सार्वजनिक अभिकरणों की परिसंपत्तियों के विनिवेश या मुद्रीकरण से प्राप्त आय का 92 प्रतिशत संबंधित अभिकरणों को देने का प्रावधान होगा।
मंत्रिमंडल ने उत्तरी भारत नहर एवं जल निकास अधिनियम-1873 को निरस्त कर राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप उत्तराखण्ड सिंचाई एवं जल निकासी विधेयक-2026 को विधानसभा में प्रस्तुत करने की मंजूरी दी। उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था नियमावली-1952 में संशोधन को भी मंजूरी प्रदान की गई।
पशुपालन, स्वास्थ्य और अन्य क्षेत्रों में फैसले
कुक्कुट आहार सब्सिडी योजना के लाभार्थियों को अब वर्तमान सीबीडीसी/ई-रूपी आधारित व्यवस्था के स्थान पर आधार से जुड़े बैंक खातों के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) से सब्सिडी देने की व्यवस्था को मंजूरी दी गई।
पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों में समन्वय, निगरानी और प्रशासनिक व्यवस्था बेहतर बनाने के लिए महानिदेशक का नया पद सृजित किया जाएगा।
वैक्टर जनित रोग नियंत्रण सेवा में नियुक्त कार्मिकों की भर्ती और सेवा शर्तों को विनियमित करने के लिए नई नियमावली-2026 को मंजूरी दी गई। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में सीनियर रेजिडेंट, जूनियर रेजिडेंट और डेमोन्स्ट्रेटर की कमी को देखते हुए संबंधित पदों पर तैनात कार्मिकों के वेतन एवं मानदेय के पुनर्निर्धारण को भी स्वीकृति दी गई।
इसके अलावा न्यायाधिकरण, देहरादून के आदेश और उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के निदेशक की संस्तुति के आधार पर सौंदर्याकरण उपशाखा को निक्षेपित करने तथा कर्मचारियों एवं विभागों से जुड़े अन्य प्रशासनिक प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।

