चंपावतटनकपुरनवीनतम

टनकपुर में भव्य सावन उत्सव-2026 का आयोजन, 10 कर्मठ महिलाओं को मिला ‘नंदा शिखर सम्मान’

ख़बर शेयर करें -

टनकपुर/चम्पावत। सेवा संकल्प फाउंडेशन की ओर से मातृशक्ति को समर्पित ‘सावन उत्सव-2026’ का आयोजन टनकपुर स्थित मिलन वाटिका में हर्षोल्लास के साथ किया गया। लोक-संस्कृति, भक्ति और मनोरंजन से सजे इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं का सम्मान करने के साथ ही उत्तराखंड की समृद्ध लोक परंपराओं को जीवंत बनाए रखना रहा।

कार्यक्रम में सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी गीता धामी ने पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ ‘एक पौधा, प्रकृति के नाम’ अभियान के तहत चंदन का पौधा रोपा। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिलाओं को पौधे वितरित कर पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण का संकल्प भी दिलाया।

Ad Ad

गीता धामी ने माताओं और बहनों से उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को संरक्षित करने तथा पारंपरिक परिधानों और सोलह श्रृंगार के साथ सांस्कृतिक उत्सवों में भागीदारी करने का आह्वान किया।

सुपर ईंजा डांस और मिसेज सावन क्वीन रहा आकर्षण

सावन उत्सव में विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक और मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए गए। लोकधुनों पर आधारित ‘सुपर ईंजा डांस प्रतियोगिता’ और रैंप वॉक के साथ आयोजित ‘मिसेज सावन क्वीन-2026’ प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

इसके अलावा समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को ‘नंदा शिखर सम्मान’ प्रदान किया गया। सभी प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करने के लिए सहभागिता पुरस्कार भी वितरित किए गए।

कार्यक्रम में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित नृत्य प्रस्तुतियां, ग्रुप डांस और नाट्य मंचन भी हुए। उत्तराखंड की लोक परंपराओं पर आधारित सांतूं-आंठू (गौरा-महेश) और झोड़ा-चांचरी की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। वहीं ‘सावन सरप्राइज अवॉर्ड्स’ और विभिन्न मनोरंजक खेलों ने कार्यक्रम में उत्साह और बढ़ा दिया।

बेटियों की शिक्षा और महिला आत्मनिर्भरता पर जोर

गीता धामी ने कहा कि मातृशक्ति केवल घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाएं खेत, संस्कृति और आजीविका की भी महत्वपूर्ण धुरी हैं। आज बेटियां शिक्षा, खेल, प्रशासन और उद्यमिता सहित हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रही हैं।

उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा को प्राथमिकता देने के लिए ‘नंदा गौरा योजना’ जैसी पहल महत्वपूर्ण हैं। शिक्षित बेटी न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज की सोच को बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

उन्होंने कहा कि वास्तविक महिला सशक्तिकरण तभी संभव है जब महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपनी पहचान स्वयं स्थापित करें। ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ और ‘लखपति दीदी’ जैसी योजनाओं के माध्यम से महिलाएं उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। ऐपण कला, हस्तशिल्प, स्थानीय खाद्य उत्पाद, कृषि, पशुपालन, सिलाई-कढ़ाई और होमस्टे जैसे क्षेत्रों में महिलाएं स्वरोजगार के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा कर रही हैं।

सेवा संकल्प फाउंडेशन की फाउंडर ट्रस्टी के रूप में गीता धामी ने कहा कि फाउंडेशन शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और मार्केटिंग के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

10 कर्मठ महिलाओं को मिला नंदा शिखर सम्मान

कार्यक्रम के दौरान स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं, शिक्षिकाओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं, आपातकालीन सेवाओं में चिकित्सा टेक्नीशियन के रूप में कार्यरत महिलाओं और क्षेत्र की प्रथम टुकटुक संचालिका सहित 10 कर्मठ महिलाओं को ‘नंदा शिखर सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

सम्मानित महिलाओं को बधाई देते हुए गीता धामी ने कहा कि यह सम्मान उनके संघर्ष, मेहनत और समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि ऐसी कर्मठ महिलाएं समृद्ध और सशक्त उत्तराखंड की मजबूत नींव हैं। उन्होंने सभी से ऐसे उत्तराखंड के निर्माण का आह्वान किया, जहां हर महिला स्वाभिमान के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ सके।

कार्यक्रम का संचालन कल्पना आर्य ने किया।

इस दौरान राज्य दर्जा मंत्री हेमा जोशी, किरन देवी, ब्लॉक प्रमुख अंचला बोहरा, जिलाध्यक्ष महिला मोर्चा दीपा जोशी, नगर पंचायत बनबसा अध्यक्ष रेखा देवी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष पुष्पा विश्वकर्मा, मंडल अध्यक्ष तुलसी कुंवर, जिला पंचायत सदस्य बनबसा सरोज चन्द, सुनीता यादव, रुचि धस्माना, रुकमणी उनियाल, बबीता गोस्वामी, मुन्नी देवी, गीता देवी, हंसा जोशी, विद्या, निशा वर्मा, रीता कलखुड़िया और उर्मिला चन्द सहित बड़ी संख्या में महिलाएं एवं गणमान्य लोग मौजूद रहे।