उत्तराखंड में यहां नौवीं की छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म, धूमधाम से हुआ नामकरण
नाबालिग छात्रा के मां बनने से सनसनी, धूमधाम से हुआ नामकरण संस्कार, नवजात को बाल संरक्षण के तहत रखा गया
उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने समाज, परिवार और व्यवस्था तीनों को झकझोर कर रख दिया है। नौवीं कक्षा में पढ़ने वाली 16 वर्षीय नाबालिग छात्रा ने एक बच्ची को जन्म दिया है। घटना का खुलासा तब हुआ, जब परिजन उसे स्वास्थ्य समस्या समझकर इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में लेकर पहुंचे।
परिवार के अनुसार छात्रा को लगातार पेट में दर्द और पथरी जैसी शिकायत हो रही थी। परिजन उसे कई अस्पतालों में दिखाते रहे, लेकिन श्रीनगर बेस चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि वह गर्भवती है। यह जानकारी सामने आते ही परिवार और अस्पताल प्रशासन दोनों हैरान रह गए। कुछ समय बाद छात्रा ने एक नवजात कन्या को जन्म दिया।

अस्पताल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तुरंत बाल कल्याण समिति को सूचना दी। समिति के निर्देश पर नवजात बच्ची को स्पेशल एडॉप्शन एजेंसी, रुद्रप्रयाग की देखरेख में रखा गया है। जन्म के 11वें दिन एजेंसी, बाल कल्याण समिति, वन स्टॉप सेंटर और चाइल्ड हेल्पलाइन की संयुक्त पहल से बच्ची का नामकरण संस्कार भी कराया गया। एजेंसी प्रबंधन के अनुसार फिलहाल बच्ची सुरक्षित देखरेख में है और निर्धारित प्रक्रिया के तहत दो माह बाद भारत सरकार के कारा पोर्टल के माध्यम से गोद लेने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मामले का सबसे गंभीर पक्ष यह है कि नाबालिग के साथ दुष्कर्म के आरोप में अब तक किसी आरोपी की पहचान सामने नहीं आ सकी है। सूत्रों के अनुसार छात्रा ने अभी तक किसी व्यक्ति का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बताया है। हालांकि वन स्टॉप सेंटर की प्रबंधक रंजना गैरोला ने बताया कि अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। प्रशासनिक स्तर पर मामले को संवेदनशील श्रेणी में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि समाज में बाल सुरक्षा, जागरूकता और संवाद की कमी पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार और स्कूल स्तर पर बच्चों की मानसिक व शारीरिक सुरक्षा को लेकर सतर्कता और संवाद बेहद जरूरी है, ताकि ऐसे मामले समय रहते सामने आ सकें। फिलहाल पुलिस और बाल संरक्षण इकाइयों की आगामी कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। वहीं एक मासूम बच्ची नई जिंदगी की शुरुआत कर चुकी है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने समाज को आत्ममंथन के लिए जरूर मजबूर कर दिया है।

