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उत्तराखंड : चार साल से बीमार थी पत्नी, तंग आकर पति ने दे दिया जहर, पांच महीने बाद FSL रिपोर्ट से खुला राज

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पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया जिसने पत्नी की बीमारी से तंग आकर उसे जहर दे दिया था

हरिद्वार। बहादराबाद थाना पुलिस ने करीब पांच महीने पुराने महिला की संदिग्ध मौत के मामले का खुलासा करते हुए उसके पति को गिरफ्तार कर लिया है। वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की रिपोर्ट में महिला की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से होने की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की।

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पुलिस के अनुसार, 4 फरवरी 2026 को मरगूबपुर निवासी मोहम्मद अनीश ने बहादराबाद कोतवाली में तहरीर देकर आरोप लगाया था कि उसकी बहन को उसके पति अफजाल ने इलाज के बहाने दवा में जहरीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया, जिससे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। एसएसपी के निर्देश पर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह के नेतृत्व में मामले की गहन जांच की गई। घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों और पोस्टमार्टम के बाद बिसरा जांच के लिए एफएसएल भेजा गया। रिपोर्ट में महिला की मौत जहरीले पदार्थ के सेवन से होने की पुष्टि हुई।

जांच में मिले वैज्ञानिक साक्ष्यों और अन्य तथ्यों के आधार पर आरोपी पति अफजाल की संलिप्तता सामने आई। पुलिस ने उसकी तलाश तेज की और 27 जून को सूचना मिलने पर बढ़ेड़ी राजपूतान हाईवे पुल, शांतर्शाह के पास घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसकी पत्नी पिछले चार वर्षों से बीमार थी और वह उसकी बीमारी से परेशान था। इसी कारण उसने इलाज के बहाने पानी में जहरीला पदार्थ मिलाकर पत्नी को पिला दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

पुलिस के अनुसार, मृतका के भाई ने शिकायत में बताया था कि करीब 20 वर्ष पहले उसकी बहन की शादी हुई थी। वह पिछले चार साल से बीमार चल रही थी और आरोपी उसका समुचित इलाज नहीं करा रहा था। आरोप है कि उसने खेतों में इस्तेमाल होने वाली जहरीली दवा महिला की दवा में मिलाकर पिला दी। हालत बिगड़ने पर आरोपी ने सच्चाई छिपाने के लिए उसे अस्पताल में भर्ती भी कराया, लेकिन महिला ने नायब तहसीलदार के समक्ष दिए गए अपने बयान में पूरी घटना का खुलासा कर दिया था। थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अमरजीत सिंह ने बताया कि वैज्ञानिक साक्ष्यों और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आरोपी की गिरफ्तारी की गई। उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है।