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चम्पावत सत्र न्यायालय ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोपी पति को दोषी पाते हुए सुनाई सजा

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चम्पावत। चम्पावत के सत्र न्यायालय ने वैवाहिक उत्पीड़न और पत्नी को आत्महत्या के लिए मजबूर करने के आरोपी पति को दोषी करार देते हुए सजा का आदेश सुनाया है। हालांकि, अदालत ने आरोपी को दहेज प्रतिषेध अधिनियम, दहेज हत्या और हत्या के आरोपों से बरी (दोषमुक्त) कर दिया है।

जानकारी के अनुसार, मृतका माया आर्या का विवाह 28 जून 2022 को संजय कुमार के साथ प्रेम विवाह के रूप में हुआ था। शादी के 14 महीने से भी कम समय के भीतर, 2 अगस्त 2023 को माया आर्या ने आत्महत्या कर ली। विवाह के इतने कम समय में बेटी की मौत होने पर मृतका के पिता ने 6 अगस्त 2023 को चम्पावत कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस द्वारा आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के बाद इस मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में चल रही थी। मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए चम्पावत के सत्र न्यायाधीश और जिला जज अनुज कुमार संगल ने सभी गवाहों, दस्तावेजों और दोनों पक्षों की दलीलों का गहन परीक्षण किया। अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने बताया कि न्यायालय ने आरोपी संजय कुमार (25 वर्ष), निवासी दुधौरी (अमोड़ी, चम्पावत) को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498ए और 306 के तहत दोषी पाया।

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अदालत ने अपने फैसले में दोषी पति संजय कुमार को आईपीसी की धारा 498ए के तहत 2 साल की कैद और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है, जबकि अर्थदंड न चुकाने पर 3 माह की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी को 7 साल की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड का आदेश दिया गया है, जिसमें जुर्माना न देने पर 6 माह की अतिरिक्त कैद होगी। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ये दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। वहीं, आरोपी को आईपीसी की धारा 304 बी, 302 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम के आरोपों में राहत देते हुए दोषमुक्त कर दिया गया है।

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