चम्पावत के लाल का देश में बजा डंका, CRPF कमांडेंट महेश चन्द्र थ्वाल को मिला राष्ट्रपति पदक
चम्पावत। उत्तराखंड के चम्पावत जिले के लिए गौरव का क्षण है। जनपद के ग्राम बडोली के मूल निवासी और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में कमांडेंट के पद पर सेवारत महेश चन्द्र थ्वाल को स्वतंत्रता दिवस 2026 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया है। सुरक्षा बलों में उनकी विशिष्ट एवं उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।
कमांडेंट महेश चन्द्र थ्वाल की इस उपलब्धि से उनके गृह क्षेत्र सहित पूरे चम्पावत जिले में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों ने इसे जिले और उत्तराखंड के लिए गौरव का विषय बताया है।
रसायन शास्त्र में पीजी के बाद चुना देशसेवा का रास्ता
महेश चन्द्र थ्वाल श्री जीवानन्द थ्वाल एवं श्रीमती निर्मला थ्वाल के पुत्र हैं। उन्होंने रसायन शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर की शिक्षा प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित सहायक कमांडेंट की परीक्षा दी और अपने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की। वर्ष 1998 में उन्होंने देशसेवा के लिए CRPF में कदम रखा।
NSG में छह साल तक निभाई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी
अपने सेवाकाल में कमांडेंट थ्वाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) में भी करीब छह वर्षों तक प्रतिनियुक्ति पर सेवाएं दीं। देश के महत्वपूर्ण सुरक्षा अभियानों और जिम्मेदारियों में उनके योगदान की सराहना हुई। सुरक्षा क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उन्हें पूर्व में सम्मानित कर चुके हैं।
चम्पावत में खुशी का माहौल
महेश चन्द्र थ्वाल को राष्ट्रपति पदक मिलने की खबर चम्पावत पहुंचते ही क्षेत्र में खुशी का माहौल बन गया। लोगों ने उनकी उपलब्धि को युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताते हुए उन्हें बधाई दी और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उनकी इस उपलब्धि पर दर्जा राज्यमंत्री श्याम नारायण पांडेय, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष प्रकाश तिवारी, भाजपा नेता शंकर दत्त पांडेय, भाजपा जिलाध्यक्ष गोविन्द सामन्त, एंजिल्स एकेडमी के प्रबंध निदेशक बंशीधर थ्वाल, केदार दत्त थ्वाल, गुणानन्द थ्वाल, देवेश थ्वाल, खीमा थ्वाल सहित क्षेत्रीय लोगों ने खुशी जताई और उन्हें शुभकामनाएं दीं। कमांडेंट महेश चन्द्र थ्वाल को मिला राष्ट्रपति पदक न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह चम्पावत की प्रतिभा, मेहनत और देशसेवा की भावना का भी सम्मान है।

