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टनकपुर गोलीकांड में पिता-पुत्र दोषी, दोनों को 7-7 साल की सजा; वैज्ञानिक विवेचना बनी अभियोजन की मजबूत कड़ी

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चम्पावत। टनकपुर के नायकगोठ में हुए सनसनीखेज गोलीकांड में सत्र न्यायालय ने पिता-पुत्र को दोषी करार देते हुए दोनों को 7-7 वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। सत्र न्यायाधीश एवं जिला जज अनुज कुमार संगल की अदालत ने मामले की विवेचना में वैज्ञानिक साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से जुटाने और सुरक्षित रखने के लिए विवेचक उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह कोरंगा की कार्यशैली की सराहना की। अदालत के फैसले के बाद दोनों दोषियों को सजायाबी वारंट के साथ जिला कारागार पिथौरागढ़ भेज दिया गया।

मामला 8 जुलाई 2024 की रात ग्राम नायकगोठ, टनकपुर का है। अभियोजन के अनुसार राजीव सिंह ने अपने पुत्र कार्तिक ठाकुर को अपने चाचा दीपक सिंह पर हमला करने के लिए उकसाते हुए कहा, “मार दे साले को।” इसके बाद कार्तिक ने तमंचे से दीपक सिंह पर गोली चला दी। गोली उनकी पीठ के निचले हिस्से में लगी और पेट से बाहर निकल गई। गंभीर रूप से घायल दीपक सिंह का लीवर क्षतिग्रस्त हो गया, डायाफ्राम फट गया और फेफड़ों में मवाद जमा हो गया। बरेली के श्री राममूर्ति अस्पताल में दो जटिल सर्जरी के बाद उनकी जान बच सकी।

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तीसरे दिन हुई गिरफ्तारी, तमंचा और कारतूस बरामद

मामले की विवेचना कर रहे उपनिरीक्षक सुरेन्द्र सिंह कोरंगा ने घटना के तीसरे दिन ही दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद 12 जुलाई 2024 को कार्तिक ठाकुर की निशानदेही पर किरोड़ा पुल के नीचे पत्थरों के बीच छिपाया गया अवैध तमंचा और दो जिंदा कारतूस बरामद किए गए।

विवेचना की खास बात यह रही कि बरामदगी की पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। वीडियो की पेनड्राइव की हैश वैल्यू भी सुरक्षित की गई, जिससे डिजिटल साक्ष्य की अखंडता बनाए रखने का प्रयास किया गया। वहीं, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) देहरादून की रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि घटनास्थल से बरामद खोखा उसी तमंचे से फायर किया गया था।

पीड़ित और परिजनों की गवाही को माना विश्वसनीय

अदालत ने अपने निर्णय में घायल दीपक सिंह, उनकी पत्नी प्रेमा सिंह और बेटी सोनाक्षी की गवाही को अत्यंत विश्वसनीय माना। बचाव पक्ष की ओर से एफआईआर में देरी, पारिवारिक रंजिश और गवाहों के बयानों में विरोधाभास को लेकर उठाए गए तर्कों को न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया।

न्यायालय ने कार्तिक ठाकुर को धारा 109(1) के तहत हत्या के प्रयास के अपराध में 7 वर्ष का कारावास, धारा 238 के तहत साक्ष्य विलोपन में 2 वर्ष तथा धारा 351(3) के तहत धमकी देने के मामले में 2 वर्ष के कारावास और संबंधित अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, उसके पिता राजीव सिंह को धारा 49 सपठित धारा 109(1) के तहत दुष्प्रेरण का दोषी मानते हुए 7 वर्ष के कारावास और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।

आर्म्स एक्ट में मिला संदेह का लाभ

अदालत ने आर्म्स एक्ट की धारा 25 के आरोप में कार्तिक ठाकुर को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। न्यायालय ने बरामदगी फर्द में 8 एमएम और 9 एमएम कारतूस को लेकर तकनीकी विसंगति तथा संबंधित सेक्शन आदेश साबित न होने को इसका आधार माना। न्यायालय ने अर्थदंड की राशि में से 60 हजार रुपये पीड़ित दीपक सिंह को प्रतिकर के रूप में देने का भी आदेश दिया। अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता विद्याधर जोशी ने मामले में पैरवी की।